उड़द का चूर्णिल आसिता रोग, जिसे Powdery Mildew कहा जाता है, पत्तियों तथा अन्य हरे भागों पर सफेद चूर्ण जैसी परत बनाने वाला फफूंदजनित रोग है। देर से बोई गई खरीफ फसल या जायद के कुछ क्षेत्रों में अनुकूल मौसम मिलने पर यह तेजी से फैल सकता है। रोग गंभीर होने पर पत्तियां सूखकर गिरती हैं और फलियों में दानों का विकास कमजोर हो सकता है। TNAU के अनुसार रोग पत्तियों, पत्ती डंठल, तने और फलियों तक फैल सकता है।
कारण
यह रोग मुख्य रूप से Erysiphe polygoni तथा संबंधित चूर्णिल आसिता फफूंदों के कारण होता है।
फफूंद पौधे की सतह पर विकसित होती है और बड़ी संख्या में बीजाणु बनाती है।
ये बीजाणु हवा के माध्यम से स्वस्थ पौधों तक पहुंचते हैं।
संक्रमित पौध अवशेषों पर बनी फफूंदीय संरचनाएं अगले मौसम में शुरुआती संक्रमण का स्रोत बन सकती हैं।
TNAU के अनुसार लगभग 22–26°C तापमान, गर्म-नम वातावरण और लगभग 80–88 प्रतिशत सापेक्ष आर्द्रता रोग के लिए अनुकूल हो सकती है।
बहुत घनी फसल और अधिक नाइट्रोजन भी रोग का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
लक्षण
शुरुआत में पुरानी या निचली पत्तियों पर छोटे सफेद चूर्णीय धब्बे दिखाई देते हैं।
ये धब्बे धीरे-धीरे बड़े होकर एक-दूसरे से मिल जाते हैं।
कुछ समय बाद पूरी पत्ती ऐसी दिखाई दे सकती है जैसे उस पर सफेद आटा छिड़का गया हो।
रोग पत्तियों के साथ-साथ पत्ती डंठल, तनों और फलियों पर भी विकसित हो सकता है।
पुराने संक्रमित हिस्से धूसर या गहरे रंग के हो सकते हैं।
गंभीर संक्रमण में पत्तियां पीली पड़ती हैं और बाद में सूखकर गिर जाती हैं।
फलियों का विकास प्रभावित हो सकता है और उनमें कम संख्या में अधूरे या हल्के बीज बन सकते हैं।
TNAU के अनुसार रोगग्रस्त पत्तियां अंततः गहरी होकर गिर सकती हैं और फलियों में कम तथा अधभरे बीज बन सकते हैं।
निदान
पत्ती की सतह पर सफेद चूर्ण जैसी परत रोग की सबसे स्पष्ट पहचान है।
उंगली से हल्का रगड़ने पर कुछ सफेद पाउडर निकल सकता है।
इसे सफेद धूल या किसी स्प्रे के सूखे अवशेष से अलग पहचानने के लिए देखें कि सफेद परत धीरे-धीरे गोल कॉलोनियों से पूरे पौधे पर फैल रही है या नहीं।
सर्कोस्पोरा में भूरे धब्बे होते हैं, जबकि चूर्णिल आसिता में सफेद सतही फफूंद दिखाई देती है।
उपाय
चूर्णिल आसिता प्रतिरोधी उड़द किस्मों को प्राथमिकता दें। ICAR-IIPR के अनुसार IPU 02-43 और IPU 11-02 जैसी किस्मों में पाउडरी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोध उपलब्ध है। कई नई किस्मों में PM सहित एक से अधिक रोगों के प्रति प्रतिरोध विकसित किया गया है।
बहुत घनी बुवाई न करें।
संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें तथा अत्यधिक नाइट्रोजन से बचें।
संक्रमित पौध अवशेषों को खेत में न छोड़ें।
रोग की शुरुआत से ही फसल की निगरानी करें।
TNAU चूर्णिल आसिता के प्रबंधन में नीम आधारित विकल्प तथा आवश्यकता अनुसार पंजीकृत फफूंदनाशी उपयोग का उल्लेख करता है।
ICAR-IIPR ने भी मूंग और उड़द के पत्ती रोगों में बीज उपचार तथा आवश्यकता आधारित फफूंदनाशी छिड़काव को एकीकृत रोग प्रबंधन के रूप में प्रभावी पाया है।
किसी भी दवा का उपयोग वर्तमान लेबल और स्थानीय कृषि अनुशंसा के अनुसार ही करें।