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मूंग

मूंग का चूर्णिल आसिता रोग

मूंग का चूर्णिल आसिता, जिसे Powdery Mildew कहा जाता है, एक फफूंदजनित रोग है जिसकी पहचान पत्तियों और पौधे के हरे भागों पर बनने वाली सफेद चूर्ण जैसी परत से की जाती है। यह रोग विशेष रूप से अपेक्षाकृत शुष्क मौसम के साथ अधिक आर्द्रता या रात में ओस वाली परिस्थितियों में बढ़ सकता है। जायद या देर से लगाई गई फसल में भी कुछ क्षेत्रों में इसका प्रकोप गंभीर हो सकता है। ICAR-IIPR ने मूंग में पाउडरी मिल्ड्यू प्रतिरोधी किस्में भी विकसित और पहचानी हैं।

मूंग का चूर्णिल आसिता, जिसे Powdery Mildew कहा जाता है, एक फफूंदजनित रोग है जिसकी पहचान पत्तियों और पौधे के हरे भागों पर बनने वाली सफेद चूर्ण जैसी परत से की जाती है। यह रोग विशेष रूप से अपेक्षाकृत शुष्क मौसम के साथ अधिक आर्द्रता या रात में ओस वाली परिस्थितियों में बढ़ सकता है। जायद या देर से लगाई गई फसल में भी कुछ क्षेत्रों में इसका प्रकोप गंभीर हो सकता है। ICAR-IIPR ने मूंग में पाउडरी मिल्ड्यू प्रतिरोधी किस्में भी विकसित और पहचानी हैं।

कारण

मूंग में चूर्णिल आसिता मुख्य रूप से Erysiphe polygoni तथा संबंधित पाउडरी मिल्ड्यू फफूंदों के कारण होता है।

फफूंद जीवित पौध ऊतकों पर बढ़ती है और पत्ती की सतह पर बड़ी संख्या में बीजाणु बनाती है।

ये बीजाणु हवा के माध्यम से बहुत आसानी से एक पौधे से दूसरे पौधे तक पहुंच जाते हैं।

मध्यम तापमान, रात में अधिक आर्द्रता, भारी ओस और दिन में अपेक्षाकृत शुष्क वातावरण रोग के लिए अनुकूल हो सकता है।

बहुत घनी फसल और अधिक नाइट्रोजन के कारण कोमल वृद्धि भी रोग के प्रसार को बढ़ा सकती है।

लक्षण

रोग की शुरुआत सामान्यतः निचली या पुरानी पत्तियों पर छोटे सफेद धब्बों से होती है।

ये धब्बे ऐसे दिखाई देते हैं जैसे पत्ती पर आटा या सफेद पाउडर छिड़क दिया गया हो।

समय के साथ छोटे धब्बे आपस में मिल जाते हैं और पत्ती की बड़ी सतह सफेद चूर्णीय परत से ढक जाती है।

रोग पत्तियों के साथ-साथ तने, शाखाओं और फलियों पर भी फैल सकता है।

पुराना संक्रमण होने पर सफेद परत का रंग धूसर या हल्का भूरा हो सकता है।

पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और गंभीर संक्रमण में समय से पहले सूखकर गिर सकती हैं।

यदि रोग फूल और फली बनने के समय अधिक हो जाए तो फलियों और बीजों का विकास प्रभावित हो सकता है।

पौधे की हरी पत्ती का क्षेत्र कम होने से प्रकाश संश्लेषण घटता है और उत्पादन कम हो सकता है।

निदान

पत्तियों पर सफेद चूर्ण जैसी परत इस रोग की सबसे स्पष्ट पहचान है।

उंगली से हल्के से रगड़ने पर सफेद पाउडर का कुछ हिस्सा हट सकता है।

इसे सामान्य धूल या स्प्रे अवशेष से अलग करने के लिए देखें कि सफेद परत पत्ती की सतह पर अलग-अलग फफूंदीय कॉलोनियों के रूप में बढ़ रही है या नहीं।

सर्कोस्पोरा या एन्थ्रेक्नोज में भूरे मृत धब्बे बनते हैं, जबकि चूर्णिल आसिता में सफेद फफूंदीय वृद्धि प्रमुख होती है।

उपाय

रोग प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग अत्यंत प्रभावी है। ICAR-IIPR ने BPMR 1, BPMR 115 तथा IPM 409-4 जैसी मूंग किस्मों में पाउडरी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोध दर्ज किया है।

स्वस्थ और प्रमाणित बीज उपयोग करें।

बहुत घनी बुवाई से बचें और अनुशंसित पौध दूरी रखें।

जरूरत से अधिक नाइट्रोजन न दें। संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं।

रोगग्रस्त फसल अवशेष और स्वयं उगे मूंग के पौधे हटाएं।

खेत की नियमित निगरानी करें, खासकर जब मौसम में रात की आर्द्रता और ओस बढ़ रही हो।

ICAR-IIPR के एकीकृत रोग प्रबंधन कार्यक्रम में मूंग के पत्ती रोगों, जिसमें पाउडरी मिल्ड्यू भी शामिल है, के लिए आवश्यकता आधारित फफूंदनाशी उपचार को प्रभावी पाया गया है।

दवा का चुनाव केवल मूंग और संबंधित रोग के लिए पंजीकृत उत्पादों में से करें तथा उत्पाद लेबल की मात्रा, सुरक्षा अवधि और स्थानीय कृषि सलाह का पालन करें।