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मूंग

मूंग की जड़ सड़न

मूंग में जड़ सड़न कई मिट्टीजनित फफूंदों के कारण हो सकती है। खेत की परिस्थितियों के अनुसार इसमें सूखी जड़ सड़न, राइजोक्टोनिया जड़ सड़न या अन्य जड़-सड़न रोग शामिल हो सकते हैं। भारत में Macrophomina phaseolina से संबंधित सूखी जड़ सड़न और अन्य मिट्टीजनित रोगजनक मूंग में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। रोग के कारण पौधे की जड़ें कमजोर होकर सड़ जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप पौधा अचानक मुरझाने और सूखने लगता है।

मूंग में जड़ सड़न कई मिट्टीजनित फफूंदों के कारण हो सकती है। खेत की परिस्थितियों के अनुसार इसमें सूखी जड़ सड़न, राइजोक्टोनिया जड़ सड़न या अन्य जड़-सड़न रोग शामिल हो सकते हैं। भारत में Macrophomina phaseolina से संबंधित सूखी जड़ सड़न और अन्य मिट्टीजनित रोगजनक मूंग में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। रोग के कारण पौधे की जड़ें कमजोर होकर सड़ जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप पौधा अचानक मुरझाने और सूखने लगता है।

कारण

जड़ सड़न के प्रमुख रोगजनकों में Macrophomina phaseolina, Rhizoctonia प्रजातियां तथा कुछ अन्य मिट्टीजनित फफूंद शामिल हो सकती हैं।

ये रोगजनक मिट्टी, संक्रमित बीज और रोगग्रस्त फसल अवशेषों में जीवित रह सकते हैं।

Macrophomina phaseolina छोटे काले माइक्रोस्क्लेरोशिया के रूप में लंबे समय तक मिट्टी में बना रह सकता है।

उच्च तापमान और कम मिट्टी नमी सूखी जड़ सड़न को बढ़ा सकते हैं, जबकि अन्य जड़ सड़न प्रकारों में अत्यधिक नमी और खराब जल निकास भी रोग की गंभीरता बढ़ा सकता है।

पौधे पर सूखा, गर्मी, पोषण असंतुलन या अन्य तनाव होने पर जड़ों की रोग प्रतिरोध क्षमता कम हो सकती है।

लक्षण

संक्रमित पौधे की वृद्धि धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।

शुरुआत में पत्तियां हल्की पीली दिखाई दे सकती हैं और बाद में पूरा पौधा मुरझा सकता है।

कई बार पौधा अचानक सूखा हुआ दिखाई देता है जबकि आसपास के पौधे स्वस्थ रहते हैं।

रोगग्रस्त पौधे को जमीन से खींचने पर वह अपेक्षाकृत आसानी से बाहर आ सकता है क्योंकि उसकी जड़ें कमजोर हो चुकी होती हैं।

मुख्य जड़ भूरे, गहरे भूरे या काले रंग की दिखाई दे सकती है।

सूखी जड़ सड़न में जड़ की बाहरी छाल आसानी से उतर सकती है और अंदर का ऊतक सूखा तथा भुरभुरा दिखाई देता है।

Macrophomina संक्रमण में जड़ या तने के निचले हिस्से पर बहुत छोटे काले बिंदु दिखाई दे सकते हैं।

कुछ अन्य प्रकार की जड़ सड़न में जड़ मुलायम, गहरी और सड़ी हुई दिखाई दे सकती है।

गंभीर संक्रमण में जड़ तंत्र इतना कम हो जाता है कि पौधा पानी और पोषक तत्वों को पर्याप्त मात्रा में ग्रहण नहीं कर पाता।

निदान

मुरझाए पौधे को सावधानी से जड़ सहित निकालकर उसकी मुख्य और पार्श्व जड़ों की जांच करें।

यदि जड़ भूरी या काली, सड़ी हुई और कमजोर है तो जड़ सड़न की संभावना है।

सूखी जड़ सड़न में जड़ भुरभुरी तथा उस पर छोटे काले माइक्रोस्क्लेरोशिया दिखाई दे सकते हैं।

पीला मोजेक रोग में जड़ सामान्य रह सकती है लेकिन पत्तियों पर पीले-हरे मोजेक लक्षण होते हैं।

जलभराव से भी जड़ें सड़ सकती हैं, इसलिए खेत की नमी और जल निकास की स्थिति भी देखें।

जड़ सड़न के अलग-अलग रोगजनकों की सही पहचान के लिए पौध रोग प्रयोगशाला जांच सबसे विश्वसनीय तरीका है।

उपाय

स्वस्थ और प्रमाणित बीज का उपयोग करें।

रोग का इतिहास वाले खेतों में स्थानीय कृषि अनुशंसा के अनुसार बीज उपचार करें। Trichoderma आधारित अनुमोदित जैव एजेंट भी एकीकृत प्रबंधन में उपयोग किए जा सकते हैं।

फसल चक्र अपनाएं और लगातार मूंग, उड़द या अन्य अत्यधिक संवेदनशील फसलें न उगाएं।

कटाई के बाद रोगग्रस्त जड़ों और पौध अवशेषों का उचित प्रबंधन करें।

खेत में जल निकास अच्छा रखें। लंबे समय तक जलभराव से बचें।

दूसरी ओर, गर्मी और सूखे की स्थिति में फसल को अत्यधिक जल तनाव में भी न आने दें, क्योंकि सूखी जड़ सड़न का जोखिम बढ़ सकता है।

अनुशंसित पौध संख्या रखें और बहुत घनी फसल से बचें।

मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी जैविक खाद देने से मिट्टी की संरचना और लाभकारी सूक्ष्मजीव गतिविधि में सुधार हो सकता है।

ICAR-IIPR मूंग के रोग प्रबंधन में एकीकृत रणनीति—स्वस्थ बीज, बीज उपचार, रोगरोधी किस्म, फसल चक्र और आवश्यकता आधारित उपचार—पर जोर देता है।

जड़ सड़न दिखाई देने के बाद ऊपर से फफूंदनाशी छिड़कने की प्रभावशीलता अक्सर सीमित होती है। इसलिए रोकथाम, बीज उपचार, मिट्टी स्वास्थ्य और उचित जल प्रबंधन इस रोग के नियंत्रण के सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं।