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चना

चना का धूसर फफूंद रोग

चना का धूसर फफूंद रोग, जिसे Botrytis Gray Mold या BGM कहा जाता है, मुख्य रूप से अधिक आर्द्रता और ठंडे से मध्यम तापमान वाली परिस्थितियों में गंभीर होता है। यह रोग पत्तियों, शाखाओं, फूलों और फलियों को प्रभावित कर सकता है। यदि फूल आने के समय लगातार बादल, कोहरा और नमी बनी रहे तो रोग बहुत तेजी से फैल सकता है। ICAR-IIPR चने में Botrytis Gray Mold को प्रमुख रोगों में शामिल करता है।

चना का धूसर फफूंद रोग, जिसे Botrytis Gray Mold या BGM कहा जाता है, मुख्य रूप से अधिक आर्द्रता और ठंडे से मध्यम तापमान वाली परिस्थितियों में गंभीर होता है। यह रोग पत्तियों, शाखाओं, फूलों और फलियों को प्रभावित कर सकता है। यदि फूल आने के समय लगातार बादल, कोहरा और नमी बनी रहे तो रोग बहुत तेजी से फैल सकता है। ICAR-IIPR चने में Botrytis Gray Mold को प्रमुख रोगों में शामिल करता है।

कारण

यह रोग मुख्य रूप से Botrytis cinerea नामक फफूंद के कारण होता है।

यह रोगजनक संक्रमित पौध अवशेषों और विभिन्न मेजबान पौधों पर जीवित रह सकता है।

अनुकूल परिस्थितियों में फफूंद बड़ी संख्या में बीजाणु बनाती है। ये हवा, बारिश और पौधों के संपर्क के माध्यम से फैलते हैं।

ठंडा से मध्यम तापमान, 90 प्रतिशत के आसपास या उससे अधिक आर्द्रता, लगातार कोहरा, बादल और पत्तियों पर लंबे समय तक नमी रोग के लिए अत्यंत अनुकूल होती है।

बहुत घनी फसल, देर से बुवाई और अधिक सिंचाई से खेत के अंदर नमी बढ़ सकती है, जिससे रोग का जोखिम बढ़ता है।

फूल आने के समय पौधे विशेष रूप से संवेदनशील हो सकते हैं।

लक्षण

रोग की शुरुआत पत्तियों, फूलों या कोमल शाखाओं पर पानी में भीगे हुए हल्के भूरे धब्बों से हो सकती है।

धीरे-धीरे संक्रमित भाग भूरा होकर सड़ने लगता है।

सबसे महत्वपूर्ण लक्षण संक्रमित भागों पर बनने वाली धूसर या राख के रंग की फफूंदीय परत है।

अधिक आर्द्रता में यह फफूंद तेजी से फैलती है और पौधे के बड़े हिस्से को ढक सकती है।

फूल संक्रमित होने पर वे झड़ सकते हैं या फलियां नहीं बन पातीं।

संक्रमित फलियों पर भूरे धब्बे और धूसर फफूंद दिखाई दे सकती है।

तने या शाखाओं पर संक्रमण होने से ऊपरी भाग मुरझाकर टूट सकता है।

गंभीर रोग में खेत में कई पौधे एक-दूसरे से चिपके हुए और धूसर फफूंद से ढके दिखाई दे सकते हैं।

निदान

धूसर फफूंद की पहचान के लिए पौधे के संक्रमित भागों पर राख या धूसर रंग की मुलायम फफूंदीय वृद्धि देखें।

यदि हल्के से पौधे को हिलाने पर धूल जैसे बीजाणु उड़ते दिखाई दें तो Botrytis संक्रमण की संभावना अधिक होती है।

इसे एस्कोकाइटा झुलसा से अलग पहचानना जरूरी है। एस्कोकाइटा में स्पष्ट गोल या लंबे धब्बे तथा उनमें छोटे काले बिंदु बनते हैं, जबकि Botrytis में धूसर फफूंदीय परत मुख्य लक्षण है।

यदि रोग गंभीर हो तो सही पहचान के लिए प्रयोगशाला जांच उपयोगी हो सकती है।

उपाय

रोग से बचाव के लिए खेत में हवा का अच्छा आवागमन बनाए रखना सबसे जरूरी उपायों में से एक है।

बहुत घनी बुवाई न करें और अनुशंसित बीज दर तथा पौध दूरी अपनाएं।

खेत में जरूरत से अधिक सिंचाई न करें। विशेष रूप से फूल आने के समय शाम में सिंचाई करने से लंबे समय तक अधिक नमी रह सकती है।

खेत में जल निकास अच्छा रखें।

संक्रमित पौधों और फसल अवशेषों को खेत से निकालकर उचित तरीके से नष्ट करें।

स्वस्थ और प्रमाणित बीज का उपयोग करें।

प्रतिरोधी या सहनशील किस्म उपलब्ध हो तो उसे प्राथमिकता दें। ICAR-IIPR के अनुसंधान कार्यक्रम में BGM प्रतिरोध विकसित करना महत्वपूर्ण लक्ष्य है।

यदि मौसम लगातार ठंडा, बादलयुक्त और नम हो तो फसल की बार-बार निगरानी करें।

शुरुआती संक्रमण दिखाई देने पर स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग द्वारा चने में Botrytis Gray Mold के लिए अनुशंसित पंजीकृत फफूंदनाशी का उपयोग किया जा सकता है।

ICRISAT के अनुसार चने के प्रमुख फफूंद रोगों में रोगमुक्त बीज, प्रतिरोधी किस्म, बीज उपचार और एकीकृत रोग प्रबंधन का संयुक्त उपयोग एकल उपाय की तुलना में अधिक प्रभावी रहता है।