उड़द का पीला मोजेक रोग, जिसे Yellow Mosaic Disease कहा जाता है, उड़द की सबसे गंभीर विषाणुजनित बीमारियों में से एक है। खरीफ मौसम में सफेद मक्खी की अधिक संख्या होने पर रोग बहुत तेजी से फैल सकता है। जायद की फसल भी इससे प्रभावित हो सकती है। पौधे की शुरुआती अवस्था में संक्रमण होने पर बढ़वार रुक जाती है, फूल और फलियां कम बनती हैं तथा बीज का आकार और वजन घट सकता है। ICAR-IIPR ने कई उड़द किस्मों में MYMV के प्रति प्रतिरोध दर्ज किया है।
कारण
यह रोग मुख्य रूप से Mungbean Yellow Mosaic India Virus (MYMIV) तथा संबंधित बेगोमोवायरस के कारण होता है।
वायरस का प्रमुख वाहक सफेद मक्खी, Bemisia tabaci है। सफेद मक्खी संक्रमित पौधे से रस चूसते समय वायरस को प्राप्त करती है और बाद में स्वस्थ पौधे पर भोजन करते समय उसे फैला सकती है।
खेत और उसके आसपास मौजूद संक्रमित उड़द, मूंग तथा कुछ अन्य दलहनी और खरपतवार पौधे वायरस तथा सफेद मक्खी दोनों के लिए स्रोत बन सकते हैं।
गर्म मौसम, सफेद मक्खी की अधिक संख्या तथा खेत में लगातार संवेदनशील मेजबान पौधों की उपलब्धता रोग के प्रसार को बढ़ाती है।
बहुत देर से बोई गई फसल कुछ क्षेत्रों में अधिक सफेद मक्खी दबाव का सामना कर सकती है।
लक्षण
शुरुआत में नई पत्तियों पर छोटे हल्के पीले धब्बे दिखाई देते हैं।
धीरे-धीरे ये धब्बे बढ़ते हैं और पत्ती पर पीले तथा हरे रंग का अनियमित मोजेक पैटर्न बन जाता है।
गंभीर संक्रमण में पत्ती का अधिकांश भाग चमकीला पीला हो सकता है और केवल छोटे हरे हिस्से दिखाई देते हैं।
संक्रमित पौधों की बढ़वार रुक जाती है और वे स्वस्थ पौधों की तुलना में छोटे तथा कमजोर दिखाई देते हैं।
शुरुआती अवस्था में संक्रमित पौधों में फूल बहुत कम बन सकते हैं।
फलियां कम, छोटी और कई बार अधूरी विकसित होती हैं। बीजों की संख्या तथा वजन भी घट सकता है।
गंभीर रोग में पूरा पौधा पीला दिखाई दे सकता है।
निदान
पत्तियों पर पीले और हरे रंग का अनियमित चितकबरा पैटर्न पीला मोजेक की मुख्य पहचान है।
इसे पोषक तत्वों की कमी से अलग पहचानना जरूरी है। पोषण की कमी में पीलापन प्रायः अपेक्षाकृत समान होता है, जबकि पीला मोजेक में पत्ती पर स्पष्ट हरे और पीले टुकड़े बने रहते हैं।
खेत में सफेद मक्खी की उपस्थिति तथा रोग का अलग-अलग पौधों या पैच में फैलना वायरस संक्रमण की संभावना को मजबूत करता है।
यदि केवल पत्तियां मुड़ रही हों और पीला-हरा मोजेक न हो, तो लीफ क्रिंकल या पत्ती मरोड़ रोग की भी जांच करनी चाहिए।
उपाय
रोग प्रतिरोधी उड़द किस्मों का उपयोग सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। ICAR-IIPR के अनुसार IPU 94-1, IPU 02-43 और IPU 11-02 जैसी किस्मों में MYMV के प्रति प्रतिरोध उपलब्ध है। क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त किस्म चुनें।
स्वस्थ और प्रमाणित बीज का उपयोग करें।
फसल की शुरुआती अवस्था से सफेद मक्खी की नियमित निगरानी करें।
रोगग्रस्त पौधों को शुरुआत में ही उखाड़कर खेत से बाहर नष्ट करें, जिससे वायरस का स्रोत कम हो।
खेत और मेड़ों पर खरपतवार तथा स्वयं उगे दलहनी पौधों को हटाएं।
अनुशंसित समय पर बुवाई करें और बहुत देर से बुवाई करने से बचें।
सफेद मक्खी का प्रकोप आर्थिक नुकसान के स्तर तक पहुंचने पर उड़द में वर्तमान में पंजीकृत और स्थानीय कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशी का उपयोग करें।
वायरस को पौधे के अंदर से नष्ट करने वाली कोई सामान्य खेत की दवा नहीं होती। इसलिए प्रतिरोधी किस्म, सफेद मक्खी नियंत्रण और संक्रमित पौधों को हटाना रोग प्रबंधन की मुख्य रणनीति है।