गेहूं की खुली कंडुआ, जिसे लूज स्मट कहा जाता है, एक बीजजनित फफूंद रोग है। इसकी खास बात यह है कि रोग का संक्रमण पिछले मौसम में बीज बनने के समय होता है, लेकिन लक्षण अगली फसल में बालियां निकलने पर दिखाई देते हैं।
कारण
यह रोग मुख्य रूप से Ustilago tritici नामक फफूंद के कारण होता है।
जब संक्रमित खेत में स्वस्थ फूलों पर फफूंद के बीजाणु पहुंचते हैं, तो वे फूल के अंदर प्रवेश कर जाते हैं और विकसित होते हुए बीज के भ्रूण में छिप जाते हैं।
ऐसा बीज बाहर से बिल्कुल स्वस्थ दिख सकता है। जब अगले मौसम में इसे बोया जाता है, तो फफूंद भी पौधे के साथ बढ़ती रहती है और बाली बनने पर रोग के लक्षण दिखाई देते हैं।
लक्षण
रोग के लक्षण बाली निकलने के समय बहुत स्पष्ट दिखाई देते हैं।
स्वस्थ गेहूं की बालियों में दाने बनते हैं, जबकि संक्रमित बाली के दाने काले पाउडर जैसे बीजाणुओं में बदल जाते हैं।
शुरुआत में संक्रमित बाली एक पतली झिल्ली से ढकी रहती है, लेकिन बाद में यह झिल्ली फट जाती है और काला चूर्ण हवा में फैल जाता है।
कुछ समय बाद केवल बाली का मुख्य डंठल बचा रह सकता है।
संक्रमित बालियां कई बार स्वस्थ बालियों की तुलना में थोड़ा पहले बाहर निकल सकती हैं।
रोग से प्रभावित बाली में कोई उपयोगी दाना नहीं बनता।
निदान
खुली कंडुआ की पहचान काफी आसान है क्योंकि संक्रमित बाली के सभी या अधिकांश दाने काले चूर्ण में बदल जाते हैं।
इसे करनाल बंट से अलग पहचानना जरूरी है। खुली कंडुआ में लगभग पूरी बाली प्रभावित हो सकती है, जबकि करनाल बंट में सामान्यतः कुछ दानों का केवल एक हिस्सा प्रभावित होता है।
रोग का वास्तविक संक्रमण बीज में छिपा रहता है, इसलिए केवल बीज को देखकर रोग पहचानना संभव नहीं होता।
उपाय
रोगमुक्त और प्रमाणित बीज का उपयोग सबसे महत्वपूर्ण उपाय है।
खेत में रोग दिखाई देने पर संक्रमित बालियों को काला चूर्ण उड़ने से पहले सावधानीपूर्वक निकालकर नष्ट किया जा सकता है, हालांकि बड़े क्षेत्र में यह सीमित रूप से उपयोगी है।
बीज उपचार इस रोग के नियंत्रण का बहुत प्रभावी तरीका है। प्रणालीगत फफूंदनाशी बीज के अंदर मौजूद रोगजनक को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
बीज उपचार के लिए केवल गेहूं में खुली कंडुआ के लिए पंजीकृत और अनुशंसित उत्पाद का उपयोग करें।
रोगग्रस्त खेत से बीज अगले मौसम के लिए रखने से बचें।
बीज उत्पादन वाले खेतों में विशेष निगरानी आवश्यक है, क्योंकि संक्रमित बीज आने वाले वर्षों में रोग फैलाने का प्रमुख स्रोत बन सकता है।