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रागी

रागी का ब्लास्ट रोग

रागी का ब्लास्ट रोग इसकी सबसे गंभीर फफूंदजनित बीमारियों में से एक है। यह पौधे को अंकुर अवस्था से लेकर दाना बनने तक प्रभावित कर सकता है। रोग पत्तियों, गांठों, बाली की गर्दन और रागी की उंगलियों तक फैल सकता है। इनमें नेक ब्लास्ट और फिंगर ब्लास्ट सबसे अधिक नुकसानदायक माने जाते हैं। गंभीर संक्रमण होने पर बाली में दाने ठीक से नहीं भरते और उपज में भारी कमी हो सकती है। ICAR के अनुसार रागी में ब्लास्ट लगभग हर वर्ष दिखाई दे सकता है और रोग के लिए अनुकूल क्षेत्रों में नुकसान बहुत अधिक हो सकता है।

रागी का ब्लास्ट रोग इसकी सबसे गंभीर फफूंदजनित बीमारियों में से एक है। यह पौधे को अंकुर अवस्था से लेकर दाना बनने तक प्रभावित कर सकता है। रोग पत्तियों, गांठों, बाली की गर्दन और रागी की उंगलियों तक फैल सकता है। इनमें नेक ब्लास्ट और फिंगर ब्लास्ट सबसे अधिक नुकसानदायक माने जाते हैं। गंभीर संक्रमण होने पर बाली में दाने ठीक से नहीं भरते और उपज में भारी कमी हो सकती है। ICAR के अनुसार रागी में ब्लास्ट लगभग हर वर्ष दिखाई दे सकता है और रोग के लिए अनुकूल क्षेत्रों में नुकसान बहुत अधिक हो सकता है।

कारण

रागी का ब्लास्ट मुख्य रूप से Pyricularia grisea नामक फफूंद के कारण होता है, जिसका संबंध Magnaporthe समूह से भी बताया जाता है।

रोगजनक संक्रमित बीज, फसल अवशेष और आसपास उगने वाली कुछ घासों पर जीवित रह सकता है। अनुकूल मौसम आने पर इसके बीजाणु हवा और वर्षा की बूंदों द्वारा स्वस्थ पौधों तक पहुंचते हैं।

लगातार बारिश, अधिक आर्द्रता, भारी ओस और पत्तियों का लंबे समय तक गीला रहना रोग को तेजी से बढ़ाता है। ICAR-IIMR के अनुसार लगभग 15–25°C न्यूनतम तापमान, 85 प्रतिशत से अधिक सापेक्ष आर्द्रता और बीच-बीच में वर्षा रोग के विकास के लिए अनुकूल हो सकती है।

अधिक नाइट्रोजन और घनी फसल भी रोग की गंभीरता बढ़ा सकती है।

लक्षण

पत्ती ब्लास्ट की शुरुआत छोटे भूरे या गहरे रंग के धब्बों से होती है।

धीरे-धीरे ये धब्बे बढ़कर अंडाकार, आंख या हीरे जैसी आकृति के हो जाते हैं। इनके बीच का भाग हल्का धूसर और किनारे गहरे भूरे दिखाई दे सकते हैं।

कई धब्बे आपस में मिल जाने पर पत्ती का बड़ा भाग झुलसकर सूख सकता है।

रोग पौधे की गर्दन अर्थात बाली के ठीक नीचे वाले हिस्से पर हमला करे तो इसे नेक ब्लास्ट कहा जाता है। संक्रमित गर्दन भूरी या काली होकर कमजोर हो जाती है।

ऐसी स्थिति में बाली पूरी तरह सूख सकती है और दाने नहीं भरते।

रागी की उंगलियों पर संक्रमण होने को फिंगर ब्लास्ट कहा जाता है। इससे उंगली के संक्रमित हिस्से भूरे या काले हो जाते हैं और उनमें दाने हल्के या खाली रह सकते हैं।

ICAR के अनुसार रागी में नेक ब्लास्ट के बाद फिंगर और लीफ ब्लास्ट आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण रूप हैं।

निदान

पत्तियों पर हल्के केंद्र और गहरे किनारे वाले अंडाकार या हीरे जैसे धब्बों को देखें।

बाली निकलने के बाद गर्दन के हिस्से में काला या भूरा संक्रमण और ऊपर की बाली का सूखना नेक ब्लास्ट की महत्वपूर्ण पहचान है।

यदि रागी की अलग-अलग उंगलियों पर काले संक्रमित हिस्से और अधूरे दाने दिखाई दें तो फिंगर ब्लास्ट की संभावना अधिक होती है।

केवल पत्ती का सामान्य सूखना ब्लास्ट की पुष्टि नहीं करता, इसलिए विशिष्ट धब्बों की उपस्थिति देखना जरूरी है।

उपाय

ब्लास्ट प्रतिरोधी रागी किस्मों का उपयोग सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। ICAR ने GPU-28 और GPU-48 जैसी किस्मों में नेक और फिंगर ब्लास्ट के प्रति प्रतिरोध का उल्लेख किया है; किस्म का चुनाव स्थानीय क्षेत्र की अनुशंसा के अनुसार करें।

स्वस्थ और प्रमाणित बीज का उपयोग करें। रोग प्रभावित खेत से बीज रखने से बचें।

अनुशंसित दूरी पर बुवाई या रोपाई करें ताकि पौधों के बीच हवा का आवागमन बना रहे।

अधिक यूरिया देने से बचें और संतुलित उर्वरक प्रयोग करें।

संक्रमित फसल अवशेष और आसपास उगने वाली रोगग्रस्त घासों का प्रबंधन करें।

बारिश और अधिक नमी वाले मौसम में नियमित निगरानी करें, विशेषकर बाली निकलने से पहले।

ICAR द्वारा प्रकाशित मिलेट रोग प्रबंधन सामग्री में रागी ब्लास्ट के लिए Pseudomonas fluorescens आधारित बीज उपचार और आवश्यकता आधारित जैव-नियंत्रण का उल्लेख है।

रोग तेजी से फैलने की स्थिति में स्थानीय कृषि विभाग द्वारा रागी ब्लास्ट के लिए अनुशंसित पंजीकृत फफूंदनाशी का उपयोग करें। दवा की मात्रा और छिड़काव समय वर्तमान लेबल के अनुसार ही रखें।