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मक्का

मक्का का डाउनी मिल्ड्यू रोग

मक्का का डाउनी मिल्ड्यू एक महत्वपूर्ण रोग है, जो विशेषकर गर्म और अधिक नमी वाले क्षेत्रों में गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। भारत में मक्का में सोरघम डाउनी मिल्ड्यू, राजस्थान डाउनी मिल्ड्यू और ब्राउन स्ट्राइप डाउनी मिल्ड्यू जैसे अलग-अलग प्रकार पाए जाते हैं। रोग पौधे की शुरुआती अवस्था में लग जाए तो बढ़वार रुक सकती है और संक्रमित पौधे भुट्टा भी नहीं बना पाते। ICAR के मक्का सुधार कार्यक्रमों में भी डाउनी मिल्ड्यू को प्रमुख जैविक तनावों में शामिल किया गया है।

मक्का का डाउनी मिल्ड्यू एक महत्वपूर्ण रोग है, जो विशेषकर गर्म और अधिक नमी वाले क्षेत्रों में गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। भारत में मक्का में सोरघम डाउनी मिल्ड्यू, राजस्थान डाउनी मिल्ड्यू और ब्राउन स्ट्राइप डाउनी मिल्ड्यू जैसे अलग-अलग प्रकार पाए जाते हैं। रोग पौधे की शुरुआती अवस्था में लग जाए तो बढ़वार रुक सकती है और संक्रमित पौधे भुट्टा भी नहीं बना पाते। ICAR के मक्का सुधार कार्यक्रमों में भी डाउनी मिल्ड्यू को प्रमुख जैविक तनावों में शामिल किया गया है।

कारण

यह रोग अलग-अलग प्रकार के ओओमाइसीट रोगजनकों के कारण हो सकता है। मक्का में सोरघम डाउनी मिल्ड्यू से जुड़े रोगजनकों में Peronosclerospora sorghi प्रमुख है।

रोगजनक संक्रमित पौधों, स्वयं उगे मक्का के पौधों और कुछ घास प्रजातियों पर जीवित रह सकता है। रोग के बीजाणु हवा और पानी के माध्यम से स्वस्थ पौधों तक पहुंच सकते हैं।

अधिक आर्द्रता, लगातार वर्षा, रात में अधिक नमी और पत्तियों पर लंबे समय तक पानी बने रहना संक्रमण को बढ़ावा देता है। खराब जल निकास वाले खेतों में भी रोग का जोखिम बढ़ सकता है।

पौधे की छोटी अवस्था में संक्रमण होने पर बीमारी अधिक गंभीर रूप ले सकती है।

लक्षण

शुरुआत में पत्तियों पर हल्के पीले या पीले-सफेद रंग की लंबी धारियां दिखाई देती हैं। ये धारियां पत्ती की नसों के समानांतर बढ़ सकती हैं।

सुबह अधिक नमी के समय पत्तियों की निचली सतह पर सफेद या धूसर रूई जैसी फफूंदीय वृद्धि दिखाई दे सकती है। यही इस रोग की महत्वपूर्ण पहचान है।

संक्रमित पौधों की वृद्धि रुक सकती है और पौधे आसपास के स्वस्थ पौधों से छोटे दिखाई देते हैं।

गंभीर संक्रमण में पत्तियां संकरी, पीली और कभी-कभी फटी हुई दिखाई दे सकती हैं। पौधे में सामान्य रूप से भुट्टा नहीं बनता या भुट्टा छोटा और अधूरा रह सकता है।

यदि संक्रमण प्रारंभिक अवस्था में हो तो पूरा पौधा कमजोर रह सकता है।

निदान

पत्ती पर लंबी पीली या सफेद धारियां तथा सुबह के समय निचली सतह पर सफेद फफूंदीय वृद्धि दिखाई देना डाउनी मिल्ड्यू का महत्वपूर्ण संकेत है।

इसे पोषक तत्वों की कमी से अलग पहचानना जरूरी है। जिंक या अन्य पोषक तत्व की कमी में भी पत्तियां पीली हो सकती हैं, लेकिन उनमें आमतौर पर फफूंद की सफेद परत नहीं बनती।

सिर्फ लक्षणों से सही प्रकार के डाउनी मिल्ड्यू की पहचान कठिन हो सकती है। गंभीर प्रकोप में कृषि विज्ञान केंद्र या पौध रोग प्रयोगशाला से जांच कराना उपयोगी है।

उपाय

अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित डाउनी मिल्ड्यू प्रतिरोधी या सहनशील मक्का किस्मों और संकरों का चुनाव करें। ICAR ने कई मक्का जीनोटाइप में सोरघम तथा अन्य डाउनी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोध या मध्यम प्रतिरोध दर्ज किया है।

स्वस्थ और प्रमाणित बीज का उपयोग करें। रोग का इतिहास होने पर स्थानीय कृषि अनुशंसा के अनुसार बीज उपचार करें।

खेत की नियमित निगरानी करें और शुरुआत में गंभीर रूप से संक्रमित पौधों को जड़ सहित निकालकर नष्ट कर दें। इससे संक्रमण स्रोत कम किया जा सकता है।

खेत और मेड़ों पर स्वयं उगे मक्का तथा अनावश्यक घास-खरपतवार को नियंत्रित करें।

जल निकास अच्छा रखें और लंबे समय तक पानी जमा न होने दें। बहुत घनी बुवाई से भी बचें।

रोग के लिए बीज उपचार या फफूंदनाशी की आवश्यकता होने पर केवल मक्का में संबंधित डाउनी मिल्ड्यू के लिए पंजीकृत उत्पाद का प्रयोग करें। उत्पाद की मात्रा स्थानीय कृषि विभाग और लेबल निर्देश के अनुसार निर्धारित करें।

प्रतिरोधी किस्म, स्वस्थ बीज, संक्रमित पौधों को हटाना और खेत में नमी का उचित प्रबंधन इस रोग से बचाव की मुख्य रणनीति है।