Get Kisan Setu AI Farming help on Play Store
Download
धान

धान का भूरा धब्बा रोग

धान का भूरा धब्बा रोग पत्तियों, पत्ती आवरण, बालियों और दानों तक को प्रभावित कर सकता है। कमजोर पोषण वाले खेतों में इसका प्रकोप अक्सर अधिक दिखाई देता है। रोग बढ़ने पर पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता कम होती है और दाने की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।

धान का भूरा धब्बा रोग
फसल स्वास्थ्य मार्गदर्शिकारोग की पहचान और सही उपचार

धान का भूरा धब्बा रोग पत्तियों, पत्ती आवरण, बालियों और दानों तक को प्रभावित कर सकता है। कमजोर पोषण वाले खेतों में इसका प्रकोप अक्सर अधिक दिखाई देता है। रोग बढ़ने पर पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता कम होती है और दाने की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।

## कारण

यह मुख्य रूप से फफूंदजनित रोग है, जिसे सामान्यतः Bipolaris oryzae से संबंधित माना जाता है। रोगजनक संक्रमित बीज और पौध अवशेषों के माध्यम से जीवित रह सकता है।

पौधों में पोषक तत्वों की कमी, कमजोर मिट्टी, जल प्रबंधन की समस्या तथा पौधों पर अन्य प्रकार का तनाव रोग की संभावना बढ़ा सकते हैं।

अधिक नमी और पत्तियों का लंबे समय तक गीला रहना संक्रमण के लिए अनुकूल होता है।

## लक्षण

प्रारंभ में पत्तियों पर छोटे, गोल या अंडाकार भूरे धब्बे दिखाई देते हैं। समय के साथ धब्बे बढ़ते हैं और उनका रंग गहरा भूरा या बैंगनी-भूरा हो सकता है।

विकसित धब्बों में बीच का भाग हल्का धूसर या सफेद और बाहर का किनारा गहरे भूरे रंग का दिखाई दे सकता है।

ICAR के अनुसार भूरा धब्बा पत्तियों के अलावा ग्लूम, कोलियोप्टाइल, पत्ती आवरण और बाली की शाखाओं पर भी दिखाई दे सकता है। संक्रमित दानों में काला या भूरा रंग आने से बीज एवं अनाज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

अधिक संक्रमण होने पर पत्तियों पर बड़ी संख्या में धब्बे बन जाते हैं। कई धब्बे आपस में मिलकर बड़े सूखे क्षेत्र का निर्माण कर सकते हैं और पत्तियां समय से पहले सूख सकती हैं।

## निदान

इस रोग की पहचान के लिए पत्तियों पर बने गोल या अंडाकार भूरे धब्बों को देखें। विकसित धब्बों का केंद्र अपेक्षाकृत हल्का तथा किनारा गहरा दिखाई देता है।

ब्लास्ट के धब्बे सामान्यतः लंबे, आंख या नाव के आकार के होते हैं, जबकि भूरे धब्बा रोग के धब्बे अक्सर अधिक गोल या अंडाकार होते हैं।

यदि पौधे कमजोर दिखाई दे रहे हों और पूरे खेत में पोषण की कमी के लक्षण भी मौजूद हों तो मृदा परीक्षण कराना उपयोगी है।

## उपाय

स्वस्थ और प्रमाणित बीज का उपयोग रोग प्रबंधन की पहली आवश्यकता है। जहां रोग का इतिहास हो वहां बीज उपचार स्थानीय कृषि विभाग की सिफारिश के अनुसार किया जा सकता है।

मिट्टी में संतुलित पोषण बनाए रखें। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने पर मृदा परीक्षण के आधार पर सुधार करें। केवल अधिक यूरिया डालना समाधान नहीं है।

पौधों को लंबे समय तक सूखे या पोषण संबंधी तनाव में न रहने दें। खेत में उचित सिंचाई और जल निकास बनाए रखें।

रोगग्रस्त फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें और अगली फसल के लिए संक्रमित बीज न रखें।

रोग का प्रकोप आर्थिक रूप से हानिकारक स्तर तक पहुंचने पर उपयुक्त पंजीकृत फफूंदनाशी प्रयोग किया जा सकता है। ICAR की खरीफ किसान सलाह में भूरे धब्बे के लिए मैनकोजेब आधारित उपचार का उल्लेख है।

दवा छिड़कने से पहले स्थानीय कृषि अधिकारी की सलाह तथा उत्पाद के लेबल पर निर्धारित मात्रा, प्रतीक्षा अवधि और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।